क्या आप हमेशा टीवी के बिल्कुल करीब बैठकर टीवी देखते हैं? क्या आपको भी गाड़ी चलाते समय सड़क संकेतों को ठीक से पढ़ने में परेशानी होती है? तो हो सकता है आपको निकट दृष्टि दोष हो। ये आँखो की एक आम बिमारी है। जिसमें पास की वस्तु तो साफ दिखाई देती है लेकिन दूर की वस्तु धुंधली दिखाई देती है। मायोपिया को निकट दृष्टि दोष भी कहा जाता है, यह तब होता है जब कॉर्निया या आंखों के किसी अन्य हिस्से का आकार क्षतिग्रस्त हो जाता है। यह आमतौर पर बचपन और किशोरावस्था के दौरान होता है। यह 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच अधिक स्थिर हो जाता है।
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) क्या है?
यह एक ऐसी आँखों से संबंधित समस्या है जिसमें दूर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देखा जा सकता। इस समस्या में, व्यक्ति को सामान्यतः करीबी वस्तुओं को ही ठीक से देखने की क्षमता होती है।
Nearsightedness (मायोपिया) के क्या कारण हो सकते है:
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- आनुवंशिक (Genetic): आनुवंशिक कारण एक मुख्य कारक है जो इसका कारण बनता है। अगर परिवार में किसी को निकट दृष्टि दोष है, तो उनके बच्चों को भी इस समस्या का सामना करने की संभावना होती है।
- आंतरिक बलों का असंतुलन: आंतरिक बलों का असंतुलन भी निकट दृष्टि दोष का कारण बन सकता है। यह बल आंतरिक आँखीय में विकसित होते हैं और उन्हें संतुलित रखने के लिए आँख को सही तरीके से फोकस करने में मदद करते हैं।
- वातावरणीय कारक: बच्चों को अधिक समय घर के अंदर बिताने से भी निकट दृष्टि दोष का कारण बन सकता है। अधिक समय घर के अंदर बिताने से वे किसी एक दूर की जगह पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दे पाते हैं, जिससे उनकी आँखों की दृष्टि पर असर पड़ता है।
- बढ़ती उम्र: बढ़ती उम्र के साथ, आँखों की कार्यशीलता में कमी हो सकती है, जिससे दृष्टि में ध्वंस हो सकता है।
- खान-पान: अधिक मात्रा में आंतरिक संभावित उत्तेजनात्मक पदार्थों (जैसे कि कैफीन और शक्तिशाली आद्यात्मिक पदार्थ) का सेवन भी निकट दृष्टि दोष को बढ़ा सकता है।
- आंखों की आदतें: बच्चों की आँखों की आदतों में बदलाव भी निकट दृष्टि दोष को बढ़ा सकता है, जैसे कि अधिक समय मोबाइल फोन या कंप्यूटर का उपयोग करना, और लंबे समय तक पढ़ाई करना।
इन कारणों के अलावा भी, अन्य कारण भी हो सकते हैं जो इसको बढ़ा सकते हैं, और इसके लिए एक आँख के विशेषज्ञ से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
- निकट दृष्टि दोष के लक्षण
- दूर की वस्तुओं का धुंधला दिखाई देना।
- सिर में लगातार दर्द होना।
- आंखों पर दबाव पड़ना।
- भेंगापन होना।
- गाड़ी चलाते समय या खेलते समय दूर की चीजों को न देख पाना।
- स्कूल में क्लास के बोर्ड की चीजें दिखाई न देना।
- बच्चा वस्तुओं को चेहरे के पास लाकर देखता है, आदि।
- व्यक्ति की आँखों में चक्कर आना, आँसू या खुजली होना, या बार-बार आँखें मसलने की इच्छा होना भी मायोपिया के लक्षण हो सकते हैं।
- लंबे समय तक किसी दूर की वस्तु को ध्यान से देखने की कोशिश करने से आँखों में दर्द या टकराव महसूस हो सकता है।
निकट दृष्टि दोष के उपचार
1. चश्मा या लेंस: निकट दृष्टि दोष का उपचार आमतौर पर चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंसेस के उपयोग से किया जाता है। यह उपचार व्यक्ति को दूरस्थित वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने में सहायक होता है।
2. लेजर सर्जरी: गंभीर मामलों में, लेजर सर्जरी भी एक विकल्प हो सकता है जिसके द्वारा कॉर्निया की समस्या को सुधारा जा सकता है।
3. आँखों की व्यायाम: इसको बढ़ाने वाले आदतों को बदलकर, आँखों का व्यायाम करना भी मायोपिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
निरीक्षण और निदान
निकट दृष्टि दोष का निदान एक आँख के विशेषज्ञ द्वारा किया जा सकता है। एक व्यक्ति को सामान्य चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंसेस विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जो व्यक्ति के दृष्टि अनुसार विशेषज्ञ द्वारा दिये जाते हैं। लेजर सर्जरी का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी आँखों की कमी अत्यंत गंभीर हो और जिन्हें चश्मा या लेंसेस का उपयोग न करके दृष्टि को सुधारने की आवश्यकता हो। यह समय लेने वाली प्रक्रिया होती है, और इसमें कुछ दिनों की आवश्यकता हो सकती है ताकि आँखें पूरी तरह से ठीक हो सकें।
आँखों के व्यायाम को भी बढ़ावा देना चाहिए। यह व्यायाम आंखों की मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में मदद करती है, जिससे दृष्टि में सुधार हो सकता है। इसमें लम्बे समय तक ध्यान देने से बचने के लिए नियमित आँखों की व्यायाम की जरूरत होती है।
इसलिए, निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) एक ऐसी सामान्य समस्या है जो किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। यह बीमारी चिकित्सा साधनों और आदतों के माध्यम से नियंत्रित की जा सकती है, जो आँखों को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करते हैं। अगर आपको इस बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं, तो आपको जल्द से जल्द एक आँख के विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए ताकि उपयुक्त उपचार कराया जा सके।
