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काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा): प्रकार, लक्षण और कारण

आंखे हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंग (sensitive organ) है, हमें इनका ख्याल रखना चाहिए अगर इनका ख्याल नहीं रखा जाए तो हमको बहुत सारी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। उन सभी बिमारियों में से एक बिमारी है काला मोतियाबिंद या ग्लूकोमा। ग्लूकोमा एक गंभीर समस्या है जो आपकी आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। अधिकतर ये परेशानी तब होती है जब हमरी आंखो के सामने वाले हिस्से में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इससे हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है और ऑप्टिक नर्व डैमेज हो जाती है।

 

इसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं – एक तो ओपन एंगल ग्लूकोमा (open angle glaucoma) और दूसरा है बंद कोण ग्लूकोमा (angel closure glaucoma).

 

ओपन एंगल ग्लूकोमा सबसे आम होता है, जिसमें आँखों पर दबाव धीरे-धीरे बढ़ता है और दृश्य दिक्कतों का कारण बनता है। बंद कोण ग्लूकोमा में, दबाव अचानक बढ़ जाता है, जो तत्काल गंभीर दृश्य नुकसान का कारण बन सकता है। यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक निर्धारित नहीं होती है, और बहुत से लोग ग्लूकोमा के लक्षणों को पहचानने में असमर्थ रहते हैं। इसलिए, नियमित आँख की जाँच और आँख की स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। अगर आपको आंखों में दिक्कतें या लक्षण महसूस होते हैं, तो आपको तत्काल एक नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते सही उपचार से, ग्लूकोमा की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और आप अपनी आँखों की स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर सकते हैं।

 

 

ग्लूकोमा होने का मुख्य कारण क्या है?

 

ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मुख्यतः यह दो कारणों से होता है:

1. आँख में दबाव (Intraocular Pressure in eyes): यह ग्लूकोमा का प्रमुख कारण है। आँख में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने वाली नलिकाओं में दबाव की बढ़त आँख के नेत्र को क्षति पहुंचा सकती है, जो ग्लूकोमा का कारण बनता है। यह दबाव आँख में हानिकारक तरीके से बढ़ सकता है, जो अन्य बीमारियों, जैसे कि आँख के रक्त की बहाव रुकाव, नेत्रधारित खून के बहाव में बढ़ोतरी, या आँख के अन्य कारणों से हो सकता है।

2. आँख के रक्त बहाव में रुकाव: अगर आँख में रक्त का सामान्य बहाव रुक जाता है, तो इससे भी ग्लूकोमा हो सकता है। यह रक्त की बहाव रुकाव आँख में दबाव बढ़ा सकता है, जो नेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।

ग्लूकोमा के अलावा, और भी कई कारण हो सकते हैं जो इसे प्रेरित करते हैं, जैसे कि उम्र, आँख की चोट, आंख की बीमारियाँ, और आँख के अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ। इन कारणों के साथ-साथ आदर्श आँख की हानि, दूधाली, और आँख की बीमारियों के उपचार में इलाज की देरी भी ग्लूकोमा के लिए एक कारण बन सकती है।

 

ग्लूकोमा के लक्षण:

 

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) के लक्षण कई हो सकते हैं और ये लक्षण अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न हो सकते हैं। यहाँ ग्लूकोमा के मुख्य लक्षणों की कुछ सामान्य सूची है:

  • दृश्य में स्थायी गिरावट (Gradual Loss of Vision): ग्लूकोमा के प्रारंभिक चरण में, व्यक्ति को धीरे-धीरे अपने दृश्य में स्थायी गिरावट महसूस होती है। यह गिरावट आमतौर पर स्थायी और अपर्णित होती है, और व्यक्ति को छोटे वस्त्रों और उपयोगी वस्त्रों में परेशानी हो सकती है।
  • तेजी से बढ़ता दृश्य नुकसान (Rapidly Progressing Vision Loss): कुछ मामलों में, ग्लूकोमा के दृश्य नुकसान की गति तेजी से बढ़ सकती है। यह तेजी से बढ़ती गिरावट अचानक हो सकती है और बिना सूचना के हो सकती है।
  • आँखों का लाल होना (Redness and halos around lights): ग्लूकोमा के विकास के साथ, व्यक्ति को लालिमा या चमकती रेखाएं देखने में महसूस हो सकती है। यह आँखों के चारों ओर एक प्रकार की गोलाकार आकृति बनती है
  • आंखों का दर्द और असहनीयता (Eye Pain and Discomfort): ग्लूकोमा के कुछ रोगियों को आंखों में दर्द और असहनीयता का अनुभव हो सकता है। यह दर्द आमतौर पर आंख के भीतरी दबाव के कारण होता है।
  • धुंधली दृष्टि (Blurred Vision): ग्लूकोमा के विकास के साथ, व्यक्ति को आंखों की दिक्कतें महसूस हो सकती हैं, जैसे कि धुंधलापन, धुंधला दृश्य, या आंखों की आलोकितता में कमी।
  • सिर में दर्द (Headache): ग्लूकोमा के कुछ रोगियों को सिर में दर्द का अनुभव हो सकता है, विशेष रूप से जब वे अधिक ध्यान या देखने की कोशिश करते हैं।
  • परिधीय दृष्टि की हानि (Loss of Peripheral Vision): ग्लूकोमा के उत्थान के साथ, व्यक्ति को आंखों के केंद्रिय दृश्य के साथ ही आंखों की असेन्ट्रिक या अधिक बाह्य दृश्य की नुकसान की अनुभूति हो सकती है।

ये लक्षण व्यक्ति के आँखों की स्थिति और ग्लूकोमा के विकास की गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। यदि आपको इन लक्षणों में से कोई भी महसूस होता है, तो तुरंत एक नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें और परामर्श लें। समय रहते सही उपचार से, ग्लूकोमा की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और आप अपनी आँखों की स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर सकते हैं।

ग्लूकोमा का उपचार कई तरीकों से किया जा सकता है, जो रोग की गंभीरता, रोगी की स्थिति, और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। ग्लूकोमा के उपचार के कुछ मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

 

  • दवाईया: ग्लूकोमा के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों का उपयोग किया जा सकता है। इन दवाओं में आँख के अंदरीय दबाव को कम करने और आँख के रक्त की बहाव को बढ़ाने के लिए उपयुक्त दवाएं शामिल होती हैं। इन दवाओं का नियमित और सही तरीके से उपयोग करने से ग्लूकोमा की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • लेजर थेरेपी (Laser Therapy): ग्लूकोमा के उपचार के लिए लेजर थेरेपी भी एक विकल्प हो सकता है। इसमें नेत्रचिकित्सक नेत्र के अंदरीय दबाव को कम करने के लिए लेजर का उपयोग करते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर आँख के कागजात के किनारों पर की जाती है और इसे ग्लूकोमा की नियंत्रण में मदद के लिए किया जाता है।
  • ग्लूकोमा सर्जरी (Glaucoma Surgery): यदि दवाओं और लेजर थेरेपी से ग्लूकोमा का नियंत्रण नहीं होता है, तो कई बार नेत्र-शल्य चिकित्सा की जाती है। इसमें विभिन्न प्रकार की किरुर्जी शामिल हो सकती है, जैसे कि ट्रबेकुलेक्टोमी, ट्रबेकुलोप्लास्टी, या अन्य उपाय। इन कार्रवाईयों का मुख्य उद्देश्य आंख के अंदरीय दबाव को कम करना होता है।
  • नियमित चेकअप: ग्लूकोमा का नियंत्रण रखने के लिए, नियमित रूप से आँख की जाँच कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। नेत्रज्ञ आपकी स्थिति को मॉनिटर करेंगे और आपको सही उपचार के बारे में सलाह देंगे।

 

ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के उपचार के लिए उपयुक्त उपाय का चयन एक नेत्रज्ञ द्वारा किया जाना चाहिए, जो रोगी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सबसे उपयुक्त उपचार का सुझाव देगा।

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Location: Jaipur, Rajasthan

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Work Employment:  Full time

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Mandatory skills:

  • Relevant medical degree / certification.
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Preferred Qualifications:

  • Experience: 3 to 6 years of experience
  • Prior experience in eye care / multi-speciality hospitals.
  • Fellowship or advanced training in Ophthalmologist.
  • Familiarity with advanced diagnostic tools and surgical techniques.
  • Passion for innovation, patient care, and continuous learning.

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