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सूखी आंखें (ड्राई आई सिंड्रोम) क्या हैं? इससे बचने के उपाय और उपचार

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी आंखों की देखभाल को हम बहुत अधिक महत्व नहीं देते हैं। इसका असर हमारी आंखों पर होता है और हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। आजकल बहुत से लोगों को ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो जाती है, जिसे हम हिंदी में ‘सूखी आंखें’ कहते हैं। यह समस्या आंखों के सतह के सूखने और आंखों की प्राकृतिक तरीके से तरलता बनाए रखने में कमी होने से होती है। आज हम इस ब्लॉग में जानेंगे कि सूखी आंखें या ड्राई आई सिंड्रोम क्या होता है, और उसका कारण, उपाय और उपचार क्या है।

 

सूखी आंखें या ड्राई आई सिंड्रोम क्या होता है?

सूखी आंखें एक आँखों से जुड़ी समस्या है, यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब आंखों की परत कंजंक्टिवा का तरल पदार्थ सुख जाता है या कम हो जाता है जिससे आंखों में आंसू की मात्रा सही नहीं बनती और उनकी गुणवत्ता नहीं होती।

आंसू तीन परतों से मिलकर बनते हैं:

  • लिपिड लेयर (तैलीय परत): यह परत आंसुओं को वाष्पीकरण से बचाती है।
  • एक्वस लेयर (पानी की परत): यह परत आंखों को नमी प्रदान करती है और गंदगी को धोने में मदद करती है।
  • म्यूस लेयर (श्लेष्म परत): यह परत आंसुओं को आंखों की सतह पर फैलने में मदद करती है।

जब इन परतों में से कोई भी सही से काम नहीं करती, तो सूखी आंखों की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
यह समस्या वृद्ध लोगों में अधिक होती है, लेकिन आजकल यह युवाओं को भी देखने को मिलता है, विशेष रूप से जो लोग कंप्यूटर या मोबाइल पर लंबा समय बिताते हैं।

 

 

आँखों में सुखेपन के कारण

  • ज्यादा समय कंप्यूटर पर काम करना
  • अधिक देर तक एसी (AC) में बैठना।
  • प्रदूषण के कारण: धूल, धुएं, धूप, अधिक गर्मी या ठंड, अधिक वातावरणीय प्रदूषण आंखों की तरलता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • विटामिन ए (vitamin A) की कमी
  • 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में उम्र बढ़ने के कारण आंसुओं का उत्पादन कई गुना कम हो जाता है।
  • लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करना
  • मेडिकल कंडीशन्स: डायबिटीज, रोमांचक रोग, थायरॉइड अवस्था, विटामिन डी की कमी जैसी मेडिकल समस्याएं भी आंखों की स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं और ड्राई आई के कारण बन सकती हैं।
  • हॉर्मोनल बदलाव: महिलाओं में गर्भावस्था, मेनोपॉज़, और हार्मोनल परिवर्तन भी आंखों की तरलता को प्रभावित कर सकते हैं।
  • दवाओं का सेवन: कुछ दवाओं का उपयोग भी ड्राई आई का कारण बन सकता है|
  • अलर्जी: कुछ लोगों में आंखों के पास अलर्जी रहती है, जो सूखी आंखों के लिए भी एक कारण हो सकती है।
  • लेंस या रेफ्रेक्टिव सर्जरी: लोगों में लेंस या लेजर रेफ्रेक्टिव सर्जरी के बाद ड्राई आई की समस्या हो सकती है।

 

सुखी आँखो (ड्राई आई सिंड्रोम) के लक्षण

  • आँखों में खुजली, चुभन जैसा महसूस होना।
  • आँखो के पास या आँखो में रेशेदार बलगम आना।
  • आँखों का लाल होना।
  • आँखों में पानी आना।
  • रात को ड्राइविंग करने में परेशानी होना।
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
  • आँखो में थकाँ महसुस होना।
  • धुंधली दृष्टि
  • कॉन्टेक्ट लेंस पहनने में परेशानी होना।
  • आँखो में किसी तिनके का एहसास होना।

 

सुखी आँखो (ड्राई आई) से बचने के उपाय और उपचार

अगर आपकी आंखें सुखी हैं तो लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने न बैठे, आंखों को नियम अंतराल पर आराम दे। हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए किसी दूर की वस्तु को देखें।

  • आँखों को शुद्ध रखे और गुनगुने पानी से साफ करे इससे सुखी आँखों में आराम मिलता है।
  • धूप, धूल और हवा से अपनी आंखों को बचाएं।
  • विटामिन ए, सी और ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले आहार का सेवन करें।
  • पानी की कमी के कारण भी सुखी आँखे जैसी स्थिति हो सकती है इसलिए प्रचुर मात्रा में पानी पिए।
  • धूप में जाते समय चश्मे का उपयोग करें।
  • आंखों के अत्यधिक सूखेपन को कम करने के लिए आई ड्रॉप का प्रयोग करें।
  • ज्यादा देर तक ए सी (AC) के सामने बैठने से बचे।
  • 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद ले जिससे आँखों जिससे को आराम मिले।
  • अगर आंख में परेशानी ज्यादा हो तो सुखी आंख का समाधान करने के लिए नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • यदि आप धुम्रपान करते हैं तो छोड़ दें, क्योंकि धुम्रपान ड्राय आई सिंड्रोम के लक्षणों को गंभीर बना देता है। धुम्रपान करने वालों से भी दूर रहें।
  • अगर आपको आंखों में सूखापन महसूस होता है तो आंखों में नमी और चिकनापन बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करें।

 

सुखी आँखो का निदान य़ा मुल्यन्कन

सुखी आँखे और उसका पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट किये जाते हैं, उसमे सम्मिलित है।

  • आँखों की जांच (Eye Test): इसमे नेत्र विशेषज्ञ आँखों का व्यापक परीक्षण करते हैं जिससे सुखी आँखों के कारण का पता लगाया जा सके।
  • शिमर परीक्षण (Schirmer’s Test): इस टेस्ट से ये पता लगाया जाता है कि आंखे आंसुओं का निर्माण कितनी मात्रा में कम कर रही है।
  • टियर ऑस्मोलैरिटी टेस्ट (Tear Osmolarity Test): इसमें आंसुओं की संरचना की जांच की जाती है, जिन लोगों को ड्राय आई की समस्या होती है, उनके आंसुओं में पानी की मात्रा कम होती है। आंसुओं की गुणवत्ता जांचने के लिए भी टेस्ट किया जाता है|

 

इलाज

जिन लोगों को ड्राई आइस की समस्या मामूली होती है या कभी-कभार होती है, उन्हें दवाइयों से ही राहत मिलती है। यदि समस्या गंभीर है तो कारण के आधार पर उपचार दिया जाता है। ड्राई आई सिंड्रोम के लिए आई ड्रॉप और कृत्रिम आँसू (artificial tear) पहली पंक्ति के उपचार हैं। आंसुओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए आंसू उत्तेजक दवाएं दी जाती हैं।

  • पंक्टल प्लग्स: ये छोटे प्लग आंसुओं के ड्रेनेज को रोकने के लिए आंसू नलिकाओं में डाले जाते हैं।
  • लिपिफ्लो: यह उपकरण आंखों की तेल ग्रंथियों को उत्तेजित करने और आंसू उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड: ये आहार सप्लिमेंट्स आंखों की सूजन को कम करने और आंसू उत्पादन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
  • लिड हाइजीन: पलकों की सफाई से तेल ग्रंथियों के ब्लॉक को हटाने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष:

सूखी आंखें एक आम लेकिन असहज स्थिति हो सकती हैं। सही देखभाल और उपचार से इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। अपनी आंखों की नियमित देखभाल करें, उचित उपाय अपनाएं, और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें। आपकी आंखें महत्वपूर्ण हैं, उनकी देखभाल करें और स्वस्थ दृष्टि का आनंद लें।

saklain

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Job Title: Consultant Ophthalmologist

Location: Jaipur, Rajasthan

Job Category: Technical/ IT Support

Work Employment:  Full time

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Preferred Qualifications:

  • Experience: 3 to 6 years of experience
  • Prior experience in eye care / multi-speciality hospitals.
  • Fellowship or advanced training in Ophthalmologist.
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